नितिन अग्रवाल
Big Breaking News- बैतूल न्यायालय ने सुनाया गंभीर मामले में अहम फैसला अनुराग तिवारी हत्याकांड में सभी लोग दोष मुक्त
भोपाल- बहुचर्चित अनुराग तिवारी हत्याकांड में माननीय न्यायालय द्वारा फैसला निर्णित किया गया। प्रकरण के तथ्य निम्नानुसार है दिनांक 18.10.2016 को अनुराग तिवारी की अवैध साधनों द्वारा मृत्यु करने की सहमति से निर्मित कर आपराधिक षडयंत्र निर्मित करने की मंशा से रात्रि में लगभग 10 बजे ईटारसी रोड स्थित अभिषेक धर्मकांटा के पास आयुध अस्त्रों से पिस्टल से गोली चलाकर मृत्यु कारित कर दी गई थी उक्त प्रकरण में थाना कोतवाली द्वारा फरियादी ओमप्रकाश मिश्रा के द्वारा जिला चिकित्सालय में उक्त आशय की रिर्पोट रात्रि में 23.15 बजे कराई गई थी जिसमें डब्बू मिश्रा के द्वारा हत्या कराये जाने के संबंध में संदेह किया गया था। उक्त प्रकरण की विवेचना पश्चात पुलिस द्वारा मनोज उर्फ मन्नू मिश्रा, अनुराग उर्फ डब्बू मिश्रा, तथागत उर्फ बुलू मिश्रा एवं राहुल उर्फ रमेश के विरूद्ध 1014/16 भा०द०वि० 302/34, 120बी का अपराध क 5.4 पंजीबद्ध किया गया था। उक्त प्रकरण माननीय न्यायालय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महोदय द्वितीय न्यायालय में प्रकरण का विचारण प्रारंभ था। जिसमें न्यायालय में साक्षी ओमप्रकाश मिश्रा, मृतक की पत्ति शिखा तिवारी, बहन रूपाली आदि के न्यायालय में साक्षी के रूप में कथन कराये गये थे एवं साथ मे स्वतंत्र साक्षी लक्ष्मीनारायण यादव, संदीप चौकीकर और
परसराम उर्फ पवन एवं डॉक्टर के कथन कराये गये थे। न्यायालय द्वारा उक्त साक्षीयों के कथन के साथ साथ प्रकरण के विवेचक सीताराम झा, एवं राजेश साहू के कथन कराये गये है एवं प्रकरण में जप्तशुदा पिस्टल और कारतूस की बेलेस्टिक रिपोर्ट पर विचार किया गया। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत हस्तगत प्रकरण एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित न होकर प्रकरण प्रत्यक्ष साक्ष्य पर आधारित माना गया और अभियोजन और बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजों की साक्ष्य का सूक्ष्मता परीशीलन और अवलोकन किया गया। ततपश्चात दिनांक 01.12.2025 को उक्त प्रकरण में आरोपी अनुराग (डब्बू) मिश्रा, मन्नू मिश्रा बुलु मिश्रा एवं राहुल को धारा 302, 120बी, 34 के प्रकरण में दोषमुक्त किया गया एवं आरोपी बुलु उर्फ तथागत मिश्रा को 25 आर्मस एक्ट में दो वर्ष की सजा और 5 हजार रूपये के जुर्माने दण्डित किया गया। उक्त प्रकरण में आरोपी तथागत उर्फ बुलु मिश्रा 2 वर्ष 7 माह जेल में विचाराधीन रहने के कारण उक्त सजा को समाहित कर दिया गया और आरोपी को रिहा किया गया। उक्त प्रकरण में आरोपियों की ओर से पैरवी प्रमेन्द्र सिंह ठाकुर जबलपुर, संजय चौरसे, संजय मिश्रा, अवध हजारे, अजीत कुशवाह, अजीत चौधरी बैतूल का विशेष सहयोग रहा।

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