✍️ नितिन अग्रवाल
"₹300 की नकल पर ₹1500 की लूट! रजिस्ट्री कार्यालय में 'नानू राज', साहब के नाम पर वसूली का खुला खेल?"
बाबू छुट्टी पर, नानू बना 'ऑल इन वन' कर्मचारी! रिकॉर्ड खंगालने से लेकर अनुवाद तक सब कुछ, और हर कदम पर अवैध उगाही के गंभीर आरोप।
बैतूल।
रजिस्ट्री कार्यालय में इन दिनों आम लोगों की जेब पर खुलेआम डाका डालने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। सरकारी नियमों के अनुसार सत्यापित प्रति (नकल) का निर्धारित शुल्क मात्र 300 रुपए है, लेकिन शिकायतों के अनुसार नकल शाखा में पदस्थ बाबू के अवकाश पर रहने का फायदा उठाकर वहां कार्यरत एक नानू आवेदकों से 1500 रुपए तक वसूल रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के बाद पड़ताल के दौरान जब अतिरिक्त राशि वसूले जाने का कारण पूछा गया तो कथित तौर पर चौंकाने वाला जवाब मिला। बताया गया कि नकल पर हस्ताक्षर कराने के लिए धुर्वे साहब के नाम पर 500 रुपए, जबकि रसीद "कंज्यूम" कराने के नाम पर साहब की कथित निजी महिला मित्र के लिए 200 रुपए लिए जाते हैं। इसके अलावा पुराने रिकॉर्ड तलाशने के नाम पर अलग से रकम वसूली जाती है, जिसे नानू ने अपना खर्च बताया।
मामला केवल अवैध वसूली तक सीमित नहीं है। शिकायतों में आरोप है कि बाबू की गैरमौजूदगी में एक व्यक्ति को पुराने सरकारी रिकॉर्ड की फोटो खींचने की खुली छूट दी गई। इतना ही नहीं, नानू द्वारा स्वयं दस्तावेजों का अनुवाद कर उनकी इबारत लिखने का काम भी किया जा रहा है, जबकि यह जिम्मेदारी केवल अधिकृत कर्मचारी की होती है।
इन गंभीर आरोपों ने पूरे उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर सरकारी कार्यालय में यह समानांतर व्यवस्था किसके संरक्षण में चल रही है? क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ उनकी जानकारी और मौन सहमति से हो रहा है?
यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं होगा, बल्कि आम नागरिकों के साथ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल होगा।
अब निगाहें जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं। जरूरत इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि रजिस्ट्री कार्यालय में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर लगाम लगे और जनता का भरोसा दोबारा कायम हो।।

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