बैतूल के अंबेडकर चौक पर दो दिनों से शिक्षा सुधार एवं छात्रों के अधिकारों की मांग को लेकर धरने पर बैठे आंदोलनकारी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई।

Today voice से अरुण कुमार बड़ोदे कि ख़ास रिपोर्ट 

बैतूल के अंबेडकर चौक पर दो दिनों से शिक्षा सुधार एवं छात्रों के अधिकारों की मांग को लेकर धरने पर बैठे आंदोलनकारी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई।

बैतूल के अंबेडकर चौक पर दो दिनों से शिक्षा सुधार एवं छात्रों के अधिकारों की मांग को लेकर धरने पर बैठे आंदोलनकारी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई।

बैतूल। शिक्षा सुधार, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक तथा छात्रों के अधिकारों की मांग को लेकर बैतूल के अंबेडकर चौक पर पिछले दो दिनों से जारी धरना-प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद स्थगित कर दिया गया।

आंदोलनकारियों ने बताया कि पिछले लगभग एक माह से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलनरत थे। इसी दौरान सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल तथा 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद देशभर में छात्रों का विरोध तेज हो गया। इसी क्रम में बैतूल में 24 जुलाई से जयस युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सोनू धुर्वे एवं जयस प्रदेश संयोजक जामवन्त सिंह कुमरे के नेतृत्व में शांतिपूर्ण धरना प्रारंभ किया गया।

इस अवसर पर सोनू धुर्वे ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों मेहनती एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगाना समय की आवश्यकता है, ताकि छात्रों का शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे और योग्य विद्यार्थियों को उनका अधिकार मिल सके।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में छात्रों के हितों, शिक्षा सुधार अथवा परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, तो छात्रों के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई जाती रहेगी।
इस दौरान जामवन्त सिंह कुमरे ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन इसके बाद देशभर के कई हिस्सों में युवा विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम ने यह संदेश दिया है कि देश का युवा लोकतांत्रिक मूल्यों और अपने अधिकारों के प्रति सजग है तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार है।
वहीं लोकेश करोचे ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम और सरकार के आचरण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों के प्रति सरकार का रवैया जनमानस में कई सवाल खड़े करता है।
जिसमे शामिल रहे संदीप परते, दिलीप सलाम, प्रिया सिरसाम, आस्था उइके सोहन धुर्वे मोहित नागले यश लिल्होरे विवेक सहारे राहुल पारते
 राजू ई वाने उमेश का काकोडिया शुभम राठौर  विधान पारधे वीरेन्द्र सिंह अंकेश कलेश यादव नितेश गावड़ रोहित नागले गौरव पटेल
हिमांशु मुकेश पारते नीरज साहू सिद्धार्थ झारबड़े सभी उपस्थि रहे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ