✍️ नितिन अग्रवाल
कलेक्टर की चौपाल, लेकिन दफ्तरों से गायब अफसर! अटैचमेंट के खेल पर उठे सवाल, महिनों लाखों की कमाई तहसीलों में जनता बेहाल
जिला मुख्यालय पर कलेक्टर की नाक के निचे मुख्यालय उपपंजीयक कार्यालय बैतूल में आदेश की उड़ाईं जा रही धज्जियां
बैतूल। एक तरफ जिले के कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे गांव-गांव पहुंचकर रात्रि चौपाल के जरिए आम जनता की समस्याएं सुन रहे हैं और अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय में कथित तौर पर अटैचमेंट का खेल चर्चा का विषय बना हुआ है। जबकि कलेक्टर ने सख्त आदेश दे दिए हैं कि कोई भी अधिकारी मुल पदस्थापना के स्थान से अन्य स्थान पर कार्य ना रहे मुल पदस्थापना पे रहकर ही अपने कार्यों का निर्वाह करें
सूत्रों का दावा है कि तहसीलों और ब्लॉक स्तर पर पदस्थ कुछ अधिकारी अपने मूल पदस्थापन स्थल पर काम करने के बजाय जिला मुख्यालय में संलग्न रहना अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे कई ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकारी नहीं मिल रहे और आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
चर्चा यह भी है कि जिला मुख्यालय में बने रहने के लिए कथित तौर पर "सेटिंग" का नेटवर्क सक्रिय है। कुछ सूत्र यहां तक दावा कर रहे हैं कि मलाईदार विभागों में टिके रहने के लिए हर महीने बड़ी रकम का लेन-देन होता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अटैचमेंट वास्तव में नियमों के विपरीत हो रहे हैं, तो आखिर इसकी अनुमति किसके स्तर पर दी जा रही है? जब कलेक्टर स्वयं हाल ही की समीक्षा बैठक में बिना अनुमति अटैचमेंट पर सख्त कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन तक की चेतावनी दे चुके हैं, तो फिर ऐसे मामलों पर अमल कब होगा?
ग्रामीण जनता की अपेक्षा है कि जिन अधिकारियों की नियुक्ति तहसीलों और ब्लॉकों में हुई है, वे वहीं रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाएं। यदि नियमों के विपरीत अटैचमेंट किए गए हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए। जनता अब यह जानना चाहती है कि सुशासन के दावों के बीच अटैचमेंट के इस कथित खेल पर प्रशासन कब और कैसे लगाम लगाएगा।

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