बैतूल जिले की बेटी का जज के पद पर हुआ था चयन लेकिन ज्वाइनिंग के पहले साध्वी बनीं प्रखर, परिवार ने शोभायात्रा निकाल कर दी विदा

Today voice से अरुण कुमार बडोदे कि ख़ास रिपोर्ट 

जज के पद पर हुआ चयन लेकिन ज्वाइनिंग के पहले साध्वी बनीं प्रखर, परिवार ने शोभायात्रा निकाल कर दी विदा
(मध्यप्रदेश) के बैतूल जिले की बेटी जो जज एग्जाम क्वालीफाई करने के बाद बनी साध्वी बैतूल की बेटी प्रखर जज की नौकरी छोड़ने के बाद चर्चा में आ गई हैं। उन्होंने न्यायिक सेवा परीक्षा पास करने के बाद वैराग्य का मार्ग अपनाया है। उनके परिवार ने परिवार ने शोभायात्रा निकाल कर उन्हें विदाई दी है।
मध्य प्रदेश के बैतूल की सड़कों पर आस्था, उत्साह और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। जैनेश्वरी दीक्षा की ओर अग्रसर नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी सहित पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया। आपको बता दें कि बैतूल की बेटी प्रखर ने अपने माता-पिता के सपने को साकार करने के लिए पहले जज के एग्जाम को क्वालीफाई किया और जॉइनिंग के पहले अपने ब्रह्मचर्य मार्ग पर निकल पड़ी। साध्वी की दीक्षा लेने के पहले उनके परिवार ने उन्हें बैतूल में ऐतिहासिक विदाई दी। 

जज की परीक्षा पास करने वाली प्रखर ने क्या बताया? 
साध्वी बनने वाली प्रखर दीदी का कहना है कि माता-पिता का सपना था कि एक बार जज का एग्जाम क्वालीफाई कर लूं वह कर लिया। बचपन से ही वैराग्य था। मैं जज बनकर या वकील बनकर समाज की वह सेवा नहीं कर पाती जो महावीर के मार्ग पर चलकर कर पाऊंगी। वहीं, रंगोली दीदी (सहारनपुर बाल ब्रम्हचारी) ने कहा कि यह हर बेटी की अंतिम विदाई का समय है। अभी हम लोगों ने रंगीन वस्त्र पहने हैं। इसके बाद दीक्षा होगी और हम सफेद वस्त्र में आ जाएंगे।

बैतूल की बेटी के त्याग की चर्चा
शहर की सड़कों पर विंटेज कारों का काफिला और उदयपुर की बैंड पार्टी जब निकली तो हर जुबान पर बैतूल की बेटी के त्याग की चर्चा थी। प्रखर दीदी के साथ चार और दीदी भी साध्वी बनी है और 22 नबंवर को दीक्षा लेंगी। उसके पहले परिजनों ने उनको विदाई दी है। बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से आयोजित इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में विंटेज कारें, आकर्षक शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आए बैंड की शानदार प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।

गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई
पांचों दीक्षार्थी बहनों का जगह-जगह पुष्पमालाओं और जयकारों के साथ आत्मीय स्वागत किया गया। भक्ति और उल्लास के वातावरण में बड़ी संख्या में समाज जन और दूर-दराज से आए श्रद्धालु शामिल हुए। चल समारोह जैन दादावाड़ी पहुंचकर संपन्न हुआ, जहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई। सांसारिक सुखों से विरक्ति और संयम के मार्ग पर बढ़ते इन कदमों का बैतूल के जैन समाज ने भव्य अभिनंदन किया।

सूरत में भी एक ऐसा मामला  देखने को मिला था 
आपको बता दें कि इससे पहले गुजरात के सूरत में करोड़पति बिजनेसमैन की 19 साल की बेटी साध्वी बन गई थीं। 19 साल की क्रिया जैन करोड़ों की विरासत छोड़ संयम और आध्यात्म की तरफ बढ़ गई थीं और श्री शीलमुदित श्रीजी महाराज साहब बन गई हैं। क्रिया का परिवार भी बेटी के फैसले से खुश हैं।

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