ताप्ती महोत्सव में दूसरे दिन बिखरे लोक संस्कृति, सुगम संगीत और साहित्य के रंग

  Today voice से अरुण कुमार बड़ोदे कि ख़ास रिपोर्ट 

ताप्ती महोत्सव में दूसरे दिन बिखरे लोक संस्कृति, सुगम संगीत और साहित्य के रंग
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन बैतूल, नगर पालिका परिषद मुलताई एवं दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर के सहयोग से आयोजित प्रतिष्ठित "ताप्ती महोत्सव" के दूसरे दिन गुरुवार को लोक संस्कृति और साहित्य के रंग में रंग गया। कलाकारों का स्वागत नगर पालिका परिषद मुलताई की अध्यक्ष श्रीमती वर्षा गणेकर, एसडीएम श्री राजीव कहार एवं सीएमओ श्री वीरेंद्र तिवारी ने किया। 

दूसरे दिन की पहली प्रस्तुति महाराष्ट्र के पारम्परिक नृत्य धनगरी गाजा की प्रस्तुति हुई। यह नृत्य श्री अनिल भीमराव कोलेकर एवं साथी, सांगली द्वारा प्रस्तुत किया गया। गज यानी हाथी, नृत्य यानी नाच, हाथी के डोलने जैसा होने वाला नृत्य यानी गजनृत्य। भगवान शंकर जी ने माता पार्वती जी को मनाने के लिये जो तांडव नृत्य किया उसी में से एक नृत्य प्रस्तुत किया गया। यह नृत्य मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य के सांगली जिला के आरेवाडी गांव से एक ही परिवार के लोग करते हैं। जो तीन पीढ़ियों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। ये सभी एक ही परिवार के कलाकार हैं जो कि इनकी पांचवीं पीढ़ी प्रस्तुत कर रही है। ढोल, कैताळ, बांसुरी, घुंघरू के ताल सुरों के साथ प्रस्तुति दी गई। 

अगली प्रस्तुति छत्तीसगढ़ के पारम्परिक पंथी नृत्य की रही। श्री सुखदेवदास बंजारा एवं साथी, दुर्ग ने इस नृत्य को उत्साह और ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया। छत्तीसगढ़ राज्य में बसे सतनामी समुदाय का यह प्रमुख नृत्य है। इस नृत्य से सम्बन्धित गीतों में मनुष्य जीवन की महत्ता के साथ आध्यात्मिक संदेश भी होता है, जिस पर निर्गुण भक्ति व दर्शन का गहरा प्रभाव है। कबीर, रैदास तथा दादू आदि संतों का वैराग्य-युक्त आध्यात्मिक संदेश भी इसमें पाया जाता है।

इसके बाद अवसर था सुगम संगीत के जादू में डूबने का। भारतीय सिनेमा संगीत के स्वर्णिम दौर के गीत जब मंच से महके तो पूरा वातावरण खुशनुमा हो गया। श्री संजय के. श्रीवास्तव एवं ग्रुप, भोपाल की सुरीली प्रस्तुति ने श्रोताओं को आनंद से भर दिया। ईश्वर की आराधना में सर्वप्रथम सत्यम शिवम सुंदरम फिल्म का गीत सत्यम शिवम सुंदरम.... से शुरुआत हुई। सदाबहार गीतों की इस बेला में अगला गीत ए प्यार तेरी पहली नजर को सलाम.... गाया। इसके बाद माझी रे...., प्यार बांटते चलो...., जैसे गीतों से शाम को सुरीला बना दिया। इसके बाद सुविख्यात पार्श्वगायक कुमार सानू के गीतों ने संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांसों की जरूरत है जैसे.... पायलियां.... गीतों ने संगीत के आनंद में रंग भर दिए। अगले क्रम में जानेजाँ ढूंढता फिर रहा...., राम तेरी गंगा मैली.... प्रस्तुत किया। श्री संजय के.श्रीवास्तव के साथ साथी गायिका सुश्री शोभना प्रधान और श्री विनय कुमार थे, वहीं की बोर्ड पर श्री गीतेश, बेस गिटार पर श्री दीप सिंह, गिटार पर श्री संदीप, ढोलक/परकसन पर श्री शैलेन्द्र एवं ऑक्टोपैड पर श्री वेदप्रकाश ने साथ दिया। इसके बाद अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें देश के सुविख्यात कवि श्री जानी बैरागी, सुश्री भुवन मोहिनी, श्री अमन अक्षर, श्री पंकज दीक्षित, सुश्री श्रद्धा शौर्य एवं श्री दीपक शुक्ला ने विविध रसों की कविताओं का पाठ कर साहित्य के मधुर रंग भर दिए। 


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