कागजों पर 'नल-जल', धरातल पर प्यासा डोक्या; सरकारी दावों की खुली पोल
भीमपुर (बैतूल): मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के हर घर तक 'नल से जल' पहुँचाने के बड़े-बड़े वादे कर रही है, लेकिन भीमपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत डोक्या की हकीकत इन दावों को ठेंगा दिखा रही है। यहाँ ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि प्रशासन की फाइलें विकास के दावों से भरी पड़ी हैं।
भीषण गर्मी से पहले ही हाहाकार
अभी गर्मी ने अपनी पूरी रफ़्तार पकड़ी भी नहीं है कि डोक्या के ग्रामीणों के लिए पानी जुटाना एक चुनौती बन गया है। गांव के हैंडपंप जवाब देने लगे हैं और कुओं का जलस्तर नीचे चला गया है। महिलाओं को कोसों दूर से सिर पर बर्तन रखकर पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनका पूरा दिन केवल पानी के इंतजाम में ही बीत जाता है।
कागजों तक सीमित योजनाएं
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की योजनाएं केवल कागजों पर टिकी हैं। नल-जल योजना के तहत जो काम होने थे, वे या तो अधूरे हैं या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा:
"सरकार कहती है कि घर-घर पानी पहुँच रहा है, लेकिन हमारे गाँव में लोग प्यासे हैं। अधिकारी आते हैं, मुआयना करते हैं और चले जाते हैं, पर प्यास बुझाने का कोई स्थायी हल नहीं निकलता।"
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ रहा आक्रोश
भीमपुर ब्लॉक के इस सुदूर अंचल में जल संकट ने अब विकराल रूप ले लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही पानी की किल्लत दूर नहीं की गई, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
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