बारां राजस्थान -श्रद्धा, आस्था और सौभाग्य का महापर्व: बारां में धूमधाम से मना गणगौर, महिलाओं ने मांगा अखंड सुहाग का आशीर्वाद

✍️नितिन अग्रवाल 


बारां राजस्थान -श्रद्धा, आस्था और सौभाग्य का महापर्व: बारां में धूमधाम से मना गणगौर, महिलाओं ने मांगा अखंड सुहाग का आशीर्वाद


बारां। राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और नारी आस्था का प्रतीक गणगौर महोत्सव इस वर्ष बारां में श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया गया। अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल चेतनाशक्ति सम्मेलन की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष सपना गोयल ने बताया कि यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि नारी शक्ति, प्रेम और अटूट विश्वास का भी अद्भुत उदाहरण है।

चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) को समर्पित है। विवाहित महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर माता गौरी की विधिवत पूजा-अर्चना की और अपने पति की लंबी आयु एवं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की। वहीं, अविवाहित युवतियों ने मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत रखकर माता पार्वती से आशीर्वाद मांगा।

गणगौर महोत्सव के दौरान शहर में पारंपरिक रंगत देखने को मिली। महिलाओं ने घूमर नृत्य किया, लोकगीत गाए और मिट्टी की सुंदर मूर्तियों की पूजा कर अपनी आस्था प्रकट की। पर्व से एक दिन पहले मनाया जाने वाला ‘सिंजारा’ भी पूरे उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें विवाहित महिलाओं को उनके पीहर से वस्त्र, गहने और मेहंदी भेंट स्वरूप भेजी गई।

गणगौर का यह उत्सव माता गौरी की मायके से ससुराल विदाई का प्रतीक माना जाता है, जिसे अंतिम दिन भव्य शोभायात्रा और विसर्जन के साथ संपन्न किया गया। पूरे आयोजन ने बारां की सांस्कृतिक समृद्धि और परंपराओं को जीवंत कर दिया।

संक्षेप में, गणगौर केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि नारी आस्था, समर्पण और वैवाहिक पवित्रता का जीवंत उत्सव है, जो समाज में प्रेम और विश्वास की मजबूत नींव को दर्शाता है।

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