✍️ नितिन अग्रवाल
बैतूल में सिगरेट के नाम पर खुली लूट! प्रिंट रेट से ऊपर धड़ल्ले से बिक्री, शासन प्रशासन की नाक के निचे चल रही लूट प्रशासन खामोश
बैतूल शहर में सिगरेट बिक्री को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि शहर के कई पान ठेलों और दुकानों पर सिगरेट खुलेआम प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। हालत यह है कि एक खुली सिगरेट पर ग्राहकों से पांच से आठ रुपए तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, जबकि पूरा पैकेट खरीदने पर भी बीस से चालीस रुपए तक ज्यादा लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह सब किसके संरक्षण में चल रहा है? जब हर सिगरेट के पैकेट पर स्पष्ट प्रिंट रेट लिखा हुआ है, तो फिर ग्राहकों से मनमानी वसूली कैसे की जा रही है? स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उन्हें खुद स्टॉकिस्टों से सिगरेट प्रिंट रेट पर, और कई बार प्रिंट रेट से भी अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती है। ऐसे में बाजार में कीमतें बढ़ना तय माना जा रहा है।
अगर दुकानदारों की बात सही है, तो सीधा सवाल स्टॉकिस्टों और सप्लाई व्यवस्था पर खड़ा होता है। आखिर संबंधित विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया? क्या प्रशासन को शहर में रोजाना हो रहे इस बड़े कारोबार की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?
ग्राहकों का भी कहना है कि सिगरेट के नाम पर खुली लूट मची हुई है, लेकिन शिकायत करने से लोग बचते हैं। वजह साफ है—कोई भी सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपना नाम नहीं जोड़ना चाहता। इसी चुप्पी का फायदा उठाकर मनमानी वसूली का यह खेल लगातार जारी है।
बैतूल में हर दिन लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक के इस कारोबार पर अगर निष्पक्ष जांच हो जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेता है या फिर आम लोगों की जेब पर पड़ रही यह अतिरिक्त मार यूं ही जारी रहेगी।

0 टिप्पणियाँ