प्रशासनिक लापरवाही: निर्माण के 48 घंटे बाद ही धंसी देवपुर कोटमी की पुलिया, निर्माण एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल

Today voice से अरुण कुमार बड़ोदे कि ख़ास रिपोर्ट 

प्रशासनिक लापरवाही: निर्माण के 48 घंटे बाद ही धंसी देवपुर कोटमी की पुलिया, निर्माण एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल

बैतूल (चिचोली): विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता के सरकारी दावों की पोल खोलते हुए चिचोली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत देवपुर कोटमी में एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ नवनिर्मित पुलिया निर्माण कार्य पूरा होने के मात्र 48 घंटे के भीतर, पहली हल्की मानसूनी बारिश का दबाव भी नहीं झेल सकी और बीच से धंस गई। इस घटना ने निर्माण एजेंसी (ग्राम पंचायत) की कार्यप्रणाली, तकनीकी पर्यवेक्षण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। लापरवाही और तकनीकी अनदेखी का प्रत्यक्ष उदाहरण
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पुलिया का निर्माण हाल ही में ग्राम पंचायत एजेंसी द्वारा कराया गया था। नियमानुसार किसी भी कंक्रीट संरचना के निर्माण के बाद पर्याप्त समय तक वाटर क्युरिंग (तलाई) और तकनीकी मापदंडों का पालन अनिवार्य होता है। परंतु, प्रशासनिक जल्दबाजी या लापरवाही के चलते, बिना उचित क्युरिंग और सुरक्षात्मक 'रिटेनिंग वॉल' (सुरक्षा दीवार) बनाए ही इसे यातायात के लिए छोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप, हल्की बारिश के कारण मिट्टी के कटाव और कंक्रीट के कमजोर जुड़ाव की वजह से पुलिया का एक हिस्सा ढह गया।
जांच के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी और एजेंसी
पुलिया के इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त होने से निम्नलिखित स्तरों पर प्रशासनिक शिथिलता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है:
गुणवत्ता नियंत्रण का अभाव: निर्माण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी (SDO) और संबंधित उपयंत्री (Sub Engineer) द्वारा मौके पर जाकर सामग्री की गुणवत्ता (सीमेंट-रेत का अनुपात) का प्रमाणीकरण क्यों नहीं किया गया?
मूल्यांकन और भुगतान की स्थिति: कार्य पूर्ण होने के तत्काल बाद बिना किसी तकनीकी 'स्टेबिलिटी टेस्ट' के कार्य का मूल्यांकन (Valuation) किस आधार पर दर्ज किया गया?
वित्तीय अनियमितता की आशंका: पहली ही बारिश में संरचना का जमींदोज होना शासकीय धन के दुरुपयोग और संभावित वित्तीय भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।
आवागमन बाधित, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
देवपुर कोटमी और इसके समीपस्थ क्षेत्रों को जोड़ने वाली इस मुख्य संपर्क मार्ग की पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र का संपर्क टूट गया है। मानसून सत्र के दौरान उफनते नदी-नालों के बीच इस मार्ग से गुजरना ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और आपातकालीन वाहनों के लिए अत्यंत जोखिम भरा हो गया है। पूर्व में भी क्षेत्र में उफनती नदी और नालों के कारण गंभीर हादसे हो चुके हैं, ऐसे में इस प्रकार का घटिया निर्माण जनहानि को खुला निमंत्रण है। 
उच्च स्तरीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर बैतूल और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत चिचोली से मांग की है कि:इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच (Technical Audit) कराई जाए।
निर्माण एजेंसी (सरपंच-सचिव) तथा संबंधित तकनीकी अधिकारी (उपयंत्री) की भूमिका तय कर उन पर प्रशासनिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए
जनता के पैसे की बर्बादी को देखते हुए दोषियों से निजी तौर पर राशि की रिकवरी कर, पुलिया का अविलंब मानक स्तर का पुनर्निर्माण कराया जाए।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ