सिस्टम की नालायकी: डोक्या में 'मौत के साए' में भविष्य गढ़ रहे मासूम, अफसरों को किसी बड़े हादसे का इंतजार!
भीमपुर (डोक्या)भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अंधापन देखना हो तो जनपद पंचायत भीमपुर की ग्राम पंचायत डोक्या के प्राथमिक शाला चले आइए। यहाँ "पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया" का नारा फटी हुई चटाइयों पर दम तोड़ रहा है। स्कूल की बिल्डिंग इतनी जर्जर हो चुकी है कि वह कभी भी मलबे में तब्दील हो सकती है। मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर इस खंडहर में बैठने को मजबूर हैं, लेकिन वातानुकूलित कमरों में बैठे शिक्षा विभाग के अफसरों की अंतरात्मा पूरी तरह मर चुकी है।
कागजी घोड़े दौड़ाकर थक गए शिक्षक, कुंभकर्णी नींद में सोया विभाग
यह कोई अचानक आई आपदा नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कत्लगाह का जीता-जागता उदाहरण है। स्कूल के शिक्षकों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कई बार लिखित प्रस्ताव भेजे। भवन की मरम्मत और बुनियादी शिक्षण सामग्री की गुहार लगाई। लेकिन साहबों की टेबल पर फाइलें धूल खा रही हैं। ऐसा लगता है कि विभाग के आला अधिकारी तब तक अपनी कुंभकर्णी नींद से नहीं जागेंगे, जब तक कोई जर्जर दीवार मासूमों पर गिर नहीं जाती और कोई बड़ा हादसा नहीं हो जाता।
फटी चटाई, खुली खिड़कियां और टपकती छत: क्या यही है सरकार का 'डिजिटल इंडिया'?
एक तरफ सरकारें शिक्षा के नाम पर करोड़ों का बजट ठिकाने लगा रही हैं, वहीं डोक्या के नौनिहालों के नसीब में एक अदद साफ चटाई तक नहीं है। बच्चे फटी-पुरानी चटाइयों पर धूल के बीच बैठने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी ऐसे टपकता है मानो स्कूल के अंदर ही नदी बह रही हो। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की इस बेरुखी ने गरीब आदिवासियों और ग्रामीणों के बच्चों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: "हादसा हुआ तो सीधे कलेक्टर और DEO जिम्मेदार होंगे
"ग्रामीणों का आक्रोश अब सातवें आसमान पर है। पालकों का साफ कहना है कि हम अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, मरने के लिए नहीं। अगर प्रशासन ने तुरंत सुध नहीं ली, स्कूल भवन की मरम्मत शुरू नहीं कराई और बैठने की व्यवस्था नहीं की, तो ग्रामीण कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। किसी भी अप्रिय घटना की सीधी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की होगी।
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