✍️ नितिन अग्रवाल
मरीजों की सेहत से खिलवाड़: बैतूल जिला अस्पताल में परोसी जा रही हैं सड़ी-गली सब्जियां, नियमों को ताक पर रख कमाया जा रहा मुनाफा
बैतूल। जिला मुख्यालय पर स्थित जिला चिकित्सालय एक बार फिर गंभीर लापरवाही और विवादों के घेरे में है। अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार मिलकर मरीजों की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। रविवार सुबह अस्पताल में मरीजों के भोजन के लिए लाई गई सब्जियों ने स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल कर रख दी है।
वीडियो बनते ही बदले सुर: 'मरीजों की सब्जी' को बताया 'जानवरों का चारा'
रविवार सुबह जब मरीजों के लिए रसोईघर में सब्जियां लाई गईं, तो उनमें भारी मात्रा में सड़ी-गली, फटी और खराब लौकी व अन्य सब्जियां शामिल थीं। सजग नागरिकों द्वारा जब इस लापरवाही का वीडियो बनाया जाने लगा, तो कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। खुद को फंसता देख कर्मचारियों ने तुरंत पासा पलटा और बहाना बनाया कि "यह खराब सब्जियां ऑटो वाले की हैं और वह इन्हें जानवरों के लिए लाया है।"
बड़ा सवाल: यदि यह सब्जियां जानवरों के लिए थीं, तो उन्हें अस्पताल की अच्छी सब्जियों के बीच छिपाकर क्यों लाया गया? और जानवरों के चारे को जिला अस्पताल प्रांगण में, ठीक रसोई के सामने कैरट (Crates) में क्यों खाली किया जा रहा था? साफ है कि वीडियो बनने के बाद कर्मचारियों ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी गढ़ी।
गाइडलाइन की धज्जियां: न ड्रेस, न ग्लव्स, जमीन पर कट रही हैं सब्जियां
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों के भोजन की स्वच्छता को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की गई है, लेकिन बैतूल जिला अस्पताल में इन नियमों का मखौल उड़ाया जा रहा है:
सुरक्षा उपकरणों का अभाव: खाना बनाने और सब्जियां काटने वाले कर्मचारी न तो साफ-सुथरे कपड़ों में थे और न ही निर्धारित ड्रेस कोड का पालन कर रहे थे।
हाइजीन शून्य: कर्मचारियों के हाथों में न तो सुरक्षा दस्ताने (Gleves) थे और न ही सिर पर टोपी (Cap)।
अस्वच्छता की हद: जिस जगह सब्जियां काटी जा रही थीं, वहां नीचे कोई कपड़ा या मैट तक नहीं बिछाई गई थी। सीधे जमीन पर रखकर सब्जियां काटी जा रही थीं, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
कलेक्टर की फटकार का भी असर नहीं, मरीजों को दी जा रही है वर्जित सब्जी
यह कोई पहला मामला नहीं है। लगभग एक वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर ने जिला अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान मरीजों को कद्दू की सब्जी दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। आज भी मरीजों को लगातार कद्दू और भिट्टे (बैंगन) की सब्जियां परोसी जा रही हैं, जबकि चिकित्सीय दृष्टिकोण से कई मरीजों के लिए भिट्टे की सब्जी पूरी तरह वर्जित होती है।
अधिकारी मौन, ठेकेदार का 'मुनाफा' चालू
अस्पताल में भर्ती असहाय मरीजों को मजबूरी में यह दूषित भोजन खाना पड़ रहा है। ठेकेदार ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में बाजार से सबसे सस्ती, रिजेक्टेड और सड़ी-गली सब्जियां खरीदकर अस्पताल ला रहा है। इतनी बड़ी धांधली और लापरवाही के बावजूद जिला चिकित्सालय के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के सामने आने और मामला तूल पकड़ने के बाद वरिष्ठ अधिकारी ठेकेदार पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
इनका कहना
इस पुरे मामले में जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डाक्टर जगदीश घोरे का कहना है कि आपके माध्यम से ज्ञात हुआ हे ठेकेदार कर जांच कर कार्यवाही की जाएगी जब उनसे ठेकेदार का नाम की जानकारी मांगी गयी तो उन्होंने कहां कल कार्यालय से दे पाऊंगा

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