रंगोली के रंगों में झलका जीवन का उजास शहरवासियों ने रंगों से विविध आकार किए साकार स्प्रेडिंग स्माइल ग्रुप के तत्वाधान में आयोजित हुई रंगोली प्रतियोगिता

  ✍बैतूल से नितिन अग्रवाल की खास रिपोर्ट



रंगोली के रंगों में झलका जीवन का उजास
शहरवासियों ने रंगों से विविध आकार किए साकार
स्प्रेडिंग स्माइल ग्रुप के तत्वाधान में आयोजित हुई रंगोली प्रतियोगिता

बैतूल। स्प्रेडिंग स्माइल ग्रुप के तत्वाधान में गुरुवार 19 नवंबर को आयोजित रंगोली प्रतियोगिता में शहर के कलाकारों ने उत्साह से भाग लिया। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए सभी कला प्रेमियों ने अपना पंजीयन करवाया, जिनके द्वारा बनाई गई रंगोली का निरीक्षण स्प्रेडिंग इस्माइल ग्रुप द्वारा किया गया। रंगोली प्रतियोगिता के माध्यम से शहर वासियों ने रंगों से विविध आकार साकार किए। उल्लेखनीय है कि बैतूल शहर में अमूमन यह पहला कार्यक्रम होगा जिसने लोक संस्कृति को रंगों के माध्यम से बढ़ावा देने का काम किया।
-पारंपरिक रंगों ने दिलाई संस्कृति की याद-
स्प्रेडिंग स्माइल ग्रुप द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता के दौरान रंगोली के रंगों में जहां इन कला प्रेमियों ने जीवन के उजास का संदेश दिया, वहीं पारंपरिक रंगों ने संस्कृति और सभ्यता की याद दिलाई। रंगोली प्रतियोगिता का शुभारंभ तरंग मैरिज गार्डन से सुबह 11 बजे किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पं.कांत दीक्षित, डॉ.नूतन राठी रहे. वही निर्णायकगणों में श्रीमती निमिषा शुक्ला, श्रीमती प्रेरणा अड़लक, हरिहर ढोमने, श्रेणिक जैन, सुधीर मालवीय शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन संदीप कौशिक द्वारा किया गया।
--140 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल--
 प्रतियोगिता के इस आयोजन को लेकर ग्रुप के संरक्षक अक्षय तातेड़ ने बताया कि प्रतियोगिता अपना आंगन अपनी रंगोली की तर्ज पर आयोजित की गई थी। तरंग मैरिज लान में सिर्फ वही प्रतियोगी शामिल हुए जिनके घर रंगोली बनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। इसके अलावा अन्य कलाकार जो बैतूल शहर के बाहर से आए थे उन्हें तरंग मैरिज लान में रंगोली बनाने की सुविधा प्रदान की गई थी। श्री तातेड़ ने बताया प्रतियोगियों ने अपने आंगन, हाल, छत पर रंगोली उकेरकर भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का परिचय दिया। उन्होंने बताया निर्णायक टीम सभी प्रतिभागियों के घर-घर जाकर अवलोकन कर रही है। अभी तक रंगोली का निर्णय पूर्ण नहीं हो पाया है, क्योंकि रंगोली की संख्या 140 से अधिक हो गई है। पहले यह संख्या 101 रखी थी, लेकिन रंगोली कलाकारों के निवेदन पर संख्या बढ़ाई गई। समस्त रंगोली का पुरस्कार वितरण 22 नवंबर को दोपहर 3 बजे तरंग मैरिज लान टिकारी में संपन्न होगा।
--हिंदू संस्कृति में रंगोली का महत्व--
उल्लेखनीय है कि रंगोली विभिन्न अवसरों दीपावली, विवाह, पूजा और कई अन्य जैसे त्योहारों पर हिंदू देवताओं और मेहमानों का स्वागत करने के लिए बनाई जाती है। रंगोली को घर और परिवार के लिए शुभ और भाग्यशाली माना जाता है। यह पूरे देश में लोकप्रिय है और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है। वास्तव में भारत के प्रत्येक राज्यों में रांगोली की अपनी ही शैली है,  डिजाइन चित्रण भी अलग-अलग होते हैं क्योंकि वे परंपराओं, लोककथाओं और प्रथाओं को प्रतिबिंबित करते हैं जो प्रत्येक क्षेत्र के लिए अद्वितीय हैं।


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