बैतूल से नितिन अग्रवाल की खास रिपोर्ट
वाह रे वन विभाग! रेंजर साहब की 'नाइट गश्त' से गायब बीट गार्ड की घर बैठे लग रही प्रेजेंट, सूखी लकड़ी लाने पर ग्रामीणों को मिल रही गालियां!
बैतूल/ दक्षिण वन मंडल ताप्ती रेंज:
दक्षिण वन मंडल के अंतर्गत आने वाली ताप्ती रेंज की डोक्या बीट में तैनात बीट गार्ड देवेंद्र धीरोड़े पर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीट गार्ड लगातार अपने कर्तव्य से अनुपस्थित रहते हैं, लेकिन वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) व उच्च अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते शासकीय रिकॉर्ड में उनकी रोजाना उपस्थिति (प्रेजेंट) दर्ज हो रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि रेंजर की नाइट गश्त के दौरान भी यह बीट गार्ड अनुपस्थित पाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जंगल में कटी लकड़ियों के मामले में भी सामने आई थी बदतमीजी
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले जंगल में अवैध रूप से कटी हुई लकड़ियों को लेकर बातें सामने आई थीं। जब इस मामले में स्थानीय लोगों ने सच्चाई जाननी चाही या बात की, तो बीट गार्ड ने ग्रामीणों के साथ बेहद बदतमीजी और अभद्र व्यवहार किया।
घरेलू लकड़ी लाने पर प्रताड़ना और गाली-गलौच
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यदि कोई गरीब ग्रामीण अपनी घरेलू जरूरतों (जैसे खाना पकाने) के लिए सूखी लकड़ियों का सिर पर गट्ठा लेकर आता है, तो बीट गार्ड देवेंद्र धीरोड़े उनके साथ गाली-गलौच करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ जहाँ बड़े मामलों को दबाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मामूली सूखी लकड़ी लाने पर ग्रामीणों को वर्दी का धौंस दिखाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल, पूछा- आखिर किसका है राजनीतिक संरक्षण?
इस तानाशाही और लाचार व्यवस्था को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा,
"आखिर इस बीट गार्ड में ऐसी क्या खास बात है कि रेंजर की नाइट गश्त में गैरहाजिर मिलने और बिना ड्यूटी आए भी इनकी रोजाना प्रेजेंट लग जाती है? क्या यह किसी बड़े राजनीतिक प्रेशर का नतीजा है या फिर वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में गरीबों को डराया जा रहा है?"
उच्च स्तरीय जांच की मांग
बिना कार्यस्थल पर उपस्थित हुए सरकारी वेतन लेना, नाइट गश्त में गायब रहने के बाद भी कार्रवाई से बचना और क्षेत्र के ग्रामीणों का शोषण करना सीधे तौर पर गंभीर प्रशासनिक भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। ग्रामीणों ने अब इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन, मुख्य वन मंडलाधिकारी (DFO) और सीएम हेल्पलाइन (181) के माध्यम से करने का निर्णय लिया है ताकि इस पूरे फर्जीवाड़े
की निष्पक्ष जांच हो सके।
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