बैतूल डॉक्टर्स डे विशेष: सेवा ही जिनका धर्म – 24x7 समर्पण की मिसाल बने डॉ. रानू वर्मा, जिला चिकित्सालय को संवारा, जिम्मेदारियों को जिया

 नितिन अग्रवाल 

बैतूल डॉक्टर्स डे विशेष: सेवा ही जिनका धर्म – 24x7 समर्पण की मिसाल बने डॉ. रानू वर्मा, जिला चिकित्सालय को संवारा, जिम्मेदारियों को जिया

बैतूल |जब चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य बन जाए, तब परिणामस्वरूप एक ऐसा व्यक्तित्व सामने आता है जो न सिर्फ मरीजों के लिए देवदूत होता है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करता है।

बैतूल जिला चिकित्सालय के डॉ. रानू वर्मा ऐसे ही समर्पित चिकित्सकों में गिने जाते हैं, जो आरएमओ (रिज़िडेंट मेडिकल ऑफिसर) के रूप में कार्यरत पीजीएमओ के साथ-साथ एक कुशल निश्चेतना विशेषज्ञ (Anesthetist) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं –

डॉ. रानू वर्मा ऐसे ही समर्पित चिकित्सकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और संवेदनशील नेतृत्व से जिला अस्पताल की कायापलट कर दी।

आरएमओ के रूप में निभाई बड़ी जिम्मेदारी, सीमित संसाधनों में किया बड़ा प्रबंधन

डॉ. रानू वर्मा ने जिला चिकित्सालय में आरएमओ जैसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पद की ज़िम्मेदारी कई वर्षों से ईमानदारी के साथ निभाई है।

अस्पताल प्रबंधन से लेकर आपातकालीन व्यवस्थाएं, सफाई, मरीजों की देखरेख, स्टाफ की ड्यूटी व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता और वार्ड अनुशासन – हर क्षेत्र में वे पूरी तत्परता और निरंतरता के साथ सक्रिय रहते हैं।

🩺 जहां दर्द दिखा, वहीं राहत देने की ठानी

डॉ. रानू वर्मा बताते हैं कि जिला अस्पताल में वर्षों तक ऐनेस्थीसिया विशेषज्ञों की कमी बनी रही। जटिल प्रसव वाली गरीब महिलाएं घंटों इंतज़ार करतीं, फिर रेफर कर दी जातीं। कई बार जान पर भी बन आती थी। इस दर्द को देखकर उन्होंने सिर्फ सोचा नहीं – सीधा निश्चेतना का प्रशिक्षण लिया और फिर लगातार ऑपरेशनों में खुद अनथक सेवा देना शुरू कर दिया।

आज वे हजारों सफल सिजेरियन और सामान्य ऑपरेशनों में निश्चेतना की सेवाएं दे चुके हैं।

सीमित संसाधनों में एक बड़े जिला चिकित्सालय को सुचारू रूप से संचालित करना हर किसी के बस की बात नहीं होती, लेकिन डॉ. वर्मा इसे सहजता और दक्षता से कर रहे हैं।

24 घंटे उपलब्ध, कभी भी मरीजों के लिए तत्पर

डॉ. वर्मा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह किसी भी समय अस्पताल पहुंच जाते हैं, चाहे देर रात हो या अवकाश का दिन। गंभीर मरीजों के इलाज से लेकर अस्पताल में किसी तकनीकी समस्या तक – वे हर मोर्चे पर हमेशा खुद को प्रस्तुत रखते हैं।

उनकी यही 24x7 सेवा भावना और जवाबदेही ने उन्हें जिला चिकित्सालय के लिए एक मजबूत स्तंभ बना दिया है।

मृदुभाषी, अनुशासित और सभी के प्रिय

डॉ. वर्मा का व्यक्तित्व उनकी विनम्रता, कुशल नेतृत्व और सहयोगी प्रवृत्ति का प्रतीक है। वे डॉक्टर हों, नर्सिंग स्टाफ, वार्डबॉय या मरीज – हर किसी से सम्मानपूर्वक व्यवहार करते हैं। उनकी यही गुणवत्ता उन्हें केवल एक सक्षम अधिकारी नहीं, बल्कि एक आदर्श इंसान भी बनाती है।

समर्थ परिवार से होने के बावजूद चुनी सेवा की राह

🙏 सशक्त परिवार से हैं, फिर भी चुना सेवा का मार्ग

डॉ. रानू वर्मा बैतूल बाज़ार के प्रतिष्ठित डॉक्टर एवं उन्नत कृषक  राधिका प्रसाद वर्मा के सुपुत्र हैं।

समर्थ पारिवारिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद उन्होंने ऐशोआराम नहीं, संवेदनशीलता और सेवा की राह को चुना। यह उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है। उन्होंने जीवन में चिकित्सा सेवा को अपना धर्म माना और निस्वार्थ भाव से जनमानस की सेवा में खुद को समर्पित किया। उनके इस निर्णय ने यह सिद्ध किया कि सेवा का रास्ता दिल से चलता है, न कि साधनों से।

डॉ. रानू वर्मा केवल एक डॉक्टर या आरएमओ नहीं हैं, वे जिम्मेदारी, सेवा और मानवता के प्रतीक बन चुके हैं।

उनका सेवा भाव, कार्यशैली और व्यवहारिक दृष्टिकोण जिला चिकित्सालय के लिए प्रेरणास्रोत है।

डॉक्टर्स डे के इस शुभ अवसर पर बैतूल उन्हें नमन करता है – एक ऐसे चिकित्सक को, जो हर दिन डॉक्टरी की परिभाषा को चरितार्थ कर रहे हैं।

🗣️ "मैं दर्द का इलाज नहीं, दर्द खुद बनकर हरता हूँ" – डॉ. वर्मा

> "मेरा मुख्य कार्य पीजीएमओ का है, लेकिन जब मैं किसी गरीब को दर्द में देखता हूँ तो रह नहीं पाता। मैंने ऐनेस्थीसिया की ट्रेनिंग सिर्फ इसलिए ली ताकि दूसरों का दर्द कम कर सकूं। मैं यह काम किसी भुगतान के लिए नहीं, एक सेवा भावना से करता हूँ।"

— डॉ. रानू वर्मा, RMO, जिला चिकित्सालय, बैतूल

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