बैतूल गौण खनिज मद के 13 लाख के काम में गड़बड़ी की शिकायत, दो फर्मों को 12.97 लाख का भुगतान बिना टेंडर, भौतिक सत्यापन

Today voice से अरुण कुमार बडोदे की खास रिपोर्ट 

बैतूल गौण खनिज मद के 13 लाख के काम में गड़बड़ी की शिकायत, दो फर्मों को 12.97 लाख का भुगतान बिना टेंडर, भौतिक सत्यापन
बिना टेंडर, भौतिक सत्यापन और उपयोगिता प्रमाण पत्र के भुगतान का आरोप, कलेक्टर से जांच की मांग

बैतूल। जनपद पंचायत बैतूल के अंतर्गत ग्राम पंचायत जामठी में सामुदायिक शिक्षण केंद्र के लिए सामग्री खरीदी के नाम पर गौण खनिज मद से करीब 13 लाख रुपए खर्च करने के मामले में अनियमितता की शिकायत सामने आई है। बैतूल निवासी पंकज अतुलकर ने 9 अक्टूबर को कलेक्टर को शिकायत कर आरोप लगाया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना दो फर्मों को 12 लाख 97 हजार 284 रुपए का भुगतान कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने टेंडर प्रक्रिया, सामग्री की आपूर्ति, भौतिक सत्यापन और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, पंचायत दर्पण पोर्टल पर कार्य आईडी 101209250 के तहत ग्राम पंचायत जामठी में सामुदायिक शिक्षण केंद्र के लिए सामग्री खरीदी का काम दर्ज है। स्कूल लैब निर्माण श्रेणी के इस कार्य के लिए 13 लाख रुपए की स्वीकृति दर्ज है। कार्य को लेकर 8 जनवरी 2025 को तकनीकी स्वीकृति जारी हुई थी, जबकि पोर्टल पर 25 जनवरी 2025 को ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की स्वीकृति दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
- तीन बिलों से हुआ भुगतान
शिकायत में पोर्टल पर दर्ज वित्तीय विवरण का हवाला देते हुए बताया गया है कि 30 जनवरी 2025 को बिल नंबर 014 के माध्यम से सदगीता फर्म को 4 लाख 70 हजार 997 रुपए का भुगतान किया गया। इसके बाद 8 फरवरी 2025 को इसी फर्म को बिल नंबर 54346536 के जरिए इतनी ही राशि का दूसरा भुगतान दर्ज है। वहीं, 3 मार्च 2025 को एमपी इंटरप्राइजेज के प्रोप्राइटर चंदेश धरमसी को बिल नंबर 55540360 के माध्यम से 3 लाख 55 हजार 290 रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह तीनों भुगतानों की कुल राशि 12 लाख 97 हजार 284 रुपए है।
- दस्तावेजों और खरीदी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
पंकज अतुलकर ने शिकायत में आरोप लगाया कि सामग्री खरीदी के लिए निर्धारित टेंडर या कोटेशन प्रक्रिया अपनाए जाने के प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सामग्री की आपूर्ति और स्थल पर भौतिक सत्यापन से संबंधित दस्तावेजों, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, भुगतान से पहले संबंधित स्वीकृतियों और अनुमोदनों की स्थिति की भी पड़ताल जरूरी है।
शिकायत में पूरे मामले की वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई है। शिकायत कलेक्ट्रेट में दर्ज कराई गई है। अब मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण से ही भुगतान प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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