लापरवाही की भेंट चढ़ रहे जंगल: कोटमी बीट में लगी भीषण आग, मौके से बीट प्रभारी नदारद

Today voice से अरुण कुमार की ख़ास रिपोर्ट 

लापरवाही की भेंट चढ़ रहे जंगल: कोटमी बीट में लगी भीषण आग, मौके से बीट प्रभारी नदारद


बैतूल दक्षिण वनमंडल ताप्ती रेंज की लापरवाही की भेंट चढ़ रहे जंगल: कोटमी बीट में लगी भीषण आग, मौके से बीट प्रभारी नदारद एक ओर जहाँ गर्मी की शुरुआत होते ही वन विभाग जंगलों को आग से बचाने के लिए 'फायर सीजन' और लाखों के बजट का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही इन दावों की पोल खोल रही है। ताजा मामला दक्षिण  वनमंडल के कोटमी बीट का है, जहाँ  जंगलों में भीषण आग लगी हुई है, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस संकट की घड़ी में बीट प्रभारी मौके से नदारद हैं।
धूँ-धूँ कर जल रही वन संपदा

कोटमी बीट के जंगलों में लगी आग तेजी से फैल रही है। आग की लपटों ने न केवल बेशकीमती लकड़ियों और औषधीय पौधों को अपनी चपेट में ले लिया है, बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा कर दिया है। आसमान में उठता धुएं का गुबार दूर से ही देखा जा सकता है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
जिम्मेदारों की गैर-मौजूदगी पर सवाल

नियमों के मुताबिक, फायर सीजन के दौरान बीट गार्ड और फायर वाचर को अपने क्षेत्र में मुस्तैद रहना अनिवार्य है। लेकिन कोटमी बीट में आग लगने के बावजूद बीट प्रभारी का मौके पर न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो यह आसपास के किसानों के खेतों तक पहुँच सकती है।
ग्रामीणों का सहयोग 
ग्राम के जिम्मेदार नागरिकों के सहयोग से आग पर काबू पाने में सफल रहे ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा   प्रशासनिक  अधिकारी की मिलीभगत से चल रहा है पूरा कार्य ओर बिट गार्ड  सप्ताह में 1-2 दिन खोलते हैं आवास बाकी पूरे समय बंद रहता है बिटगार्ड आवास 
जांच का विषय
जंगलों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों की यह बेरुखी न केवल शासकीय कर्तव्यों का उल्लंघन है, बल्कि प्राकृतिक संपदा के प्रति अपराध भी है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग के उच्चाधिकारी इस लापरवाही पर संबंधित बीट प्रभारी के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं।

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