बैतूल गांव की मिट्टी से उठकर आईएएस तक: डॉ. सौरभ सोनवाने बने बैतूल के नए कलेक्टर, फैसलों से बदलेंगे सिस्टम की तस्वीर”

✍️ नितिन अग्रवाल 


बैतूल गांव की मिट्टी से उठकर आईएएस तक: डॉ. सौरभ सोनवाने बने बैतूल के नए कलेक्टर, फैसलों से बदलेंगे सिस्टम की तस्वीर”


श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी मध्य प्रदेश कैडर के 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। उन्होंने 2 जनवरी 2024 को बैतूल जिले के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यभार संभाला था। हालांकि, 9 अप्रैल 2026 को हुए हालिया प्रशासनिक फेरबदल के अनुसार, अब उनका तबादला कर दिया गया है और उनकी जगह डॉ. सौरभ संजय सोनवाने को बैतूल का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है

डॉ. सौरभ संजय सोनवाने ये 2017 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और पेशे से MBBS डॉक्टर भी हैं।

पिछली पोस्टिंग: बैतूल आने से पहले वे रीवा नगर निगम आयुक्त के रूप में कार्यरत थे।

कार्यशैली: वे अपनी अनूठी और ऊर्जावान कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। रीवा में उन्होंने 'नो कार डे' (No Car Day) जैसी पहल शुरू की थी और अक्सर सुबह साइकिल से शहर का निरीक्षण करने निकलते थे।

उपलब्धियाँ: उनके नेतृत्व में रीवा नगर निगम ने स्वच्छता सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण सुधार किया था

महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से निकलकर अपने दम पर आईएएस बनने वाले डॉ. सौरभ सोनवणे अब बैतूल जिले के नए कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। एक साधारण परिवार से आने वाले डॉ. सोनवणे ने पहले मेडिकल की पढ़ाई पूरी की, और फिर बिना किसी कोचिंग के यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की।

उनकी सोच साफ है—प्रशासन में सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि मौके पर सही और तेज़ निर्णय लेने की क्षमता ही असली ताकत होती है।

बैतूल जैसे आदिवासी बहुल जिले में उनकी नियुक्ति से विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास उनके प्रमुख फोकस क्षेत्र रहेंगे। डॉक्टर से प्रशासक बने सोनवणे जमीनी हकीकत को समझते हैं, और यही अनुभव अब जिले के लोगों के काम आने वाला है।

स्थानीय लोगों में भी नए कलेक्टर को लेकर उत्साह है। उम्मीद की जा रही है कि उनकी कार्यशैली पारदर्शिता, संवेदनशीलता और तेजी से फैसले लेने के लिए जानी जाएगी।

एक छोटे गांव से निकलकर प्रशासन के शीर्ष पद तक पहुंचने की यह कहानी सिर्फ प्रेरणा नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।

अब देखना होगा कि डॉ. सौरभ सोनवणे अपने अनुभव और सोच के साथ बैतूल को विकास की नई ऊंचाइयों तक कैसे पहुंचाते हैं।

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