Today voice से अरुण कुमार बड़ोदे कि ख़ास रिपोर्ट
दक्षिण वनमंडल में सुलग रहे जंगल, ड्यूटी से 'लापता' जिम्मेदार; कागजों पर सुधर रही व्यवस्था! डोक्या
बैतूल/ खेड़ीसावलीगढ़ दक्षिण वनमंडल ताप्ती रेंज का मामला जहां एक तरफ नौतपा की भीषण गर्मी और तपती धूप ने आम जनजीवन को बेहाल कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ बैतूल जिले के दक्षिण वनमंडल ताप्ती रेंज के जंगलों से एक बेहद चिंताजनक और प्रशासनिक लापरवाही की हैरान करने वाली तस्वीर सामने आ रही है। जिले के दक्षिण वनमंडल अंतर्गत ताप्ती रेंज की 'डोक्या कोटमी' बीट के जंगल इस समय भीषण आग की चपेट में धधक रहे हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस संकट की घड़ी में जंगल को बचाने वाले जिम्मेदार मैदानी अमले का दूर-दूर तक अता-पता नहीं है।
महीनों से फरार 'बिट गार्ड', कागजों पर हाजिरी फुल
स्थानीय सूत्रों और धरातल से मिल रही खबरों के मुताबिक, डोक्या बीट के बिट गार्ड पिछले कई महीनों से अपने मुख्यालय से नदारद (फरार) हैं। जब जंगल को सबसे ज्यादा सुरक्षा और निगरानी की जरूरत है, तब जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी फील्ड से गायब हैं। चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस अनुपस्थिति के बावजूद, वन विभाग के दफ्तरों में कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं और अधिकारियों की 'कागजी अटेंडेंस' (हाजिरी) रोज नियमित रूप से दर्ज हो रही है।
मुख्य बिंदु: सुलगते सवाल और जमीनी हकीकत
तपती धूप में खाक होता जंगल: ताप्ती रेंज के डोक्या कोटमी बीट में लगी आग लगातार फैल रही है, जिससे बेशकीमती वन संपदा और वन्यजीवों के जीवन पर भारी संकट मंडरा रहा है।
मुख्यालय से गायब स्टाफ: आग बुझाने और इसकी रोकथाम के लिए तैनात रहने वाले कर्मचारी और बिट गार्ड महीनों से ड्यूटी पर नहीं आए हैं।
कागजी जादूगरी:
फील्ड पर गायब रहने के बाद भी कर्मचारियों की उपस्थिति रजिस्टर और सरकारी रिकॉर्ड्स में उन्हें 'ऑन ड्यूटी' दिखाया जा रहा है।
बड़ा सवाल: किसकी शह पर चल रहा है यह खेल?
इस पूरे मामले ने वन विभाग के आला अधिकारियों की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि जब धरातल पर जंगल जल रहे हैं और कर्मचारी गायब हैं, तो वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे यह 'कागजी हाजिरी' का खेल किसकी शह पर और क्यों चल रहा है? क्या विभाग को जंगल और वन्यजीवों की बर्बादी का कोई डर नहीं है?
प्रशासनिक चुप्पी और जनता में आक्रोश
इस भीषण लापरवाही को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ताप्ती रेंज का एक बड़ा हिस्सा राख के ढेर में तब्दील हो जाएगा। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद दक्षिण वनमंडल के आला अधिकारी जागते हैं या फिर फाइलों में ही 'सब ऑल इज वेल' का खेल चलता रहेगा।
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