अरुण बड़ोदे
बैतूल रात के अंधेरे में सड़क घोटाला! डोक्या-चांदू मार्ग पर अंकुर कंस्ट्रक्शन की मनमानी, डामर के गड्ढों में भर रहे सीमेंट, ग्रामीणों में फूटा गुस्सा
तकनीकी नियमों की उड़ रही धज्जियां, सवाल उठाने पर इंजीनियर के तीखे तेवर; ग्रामीणों ने मांगी उच्च स्तरीय जांच
डोक्या-चांदू (अमरावती)। ताप्ती-परतवाड़ा मुख्य मार्ग से ग्राम डोक्या-चांदू को जोड़ने वाले सड़क नवीनीकरण कार्य में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। सड़क निर्माण का ठेका लेने वाली अंकुर कंस्ट्रक्शन कंपनी पर तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी करते हुए घटिया गुणवत्ता का कार्य करने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिससे सड़क की हालत सुधरने के बजाय और अधिक खराब होती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, जिस सड़क को गड्ढामुक्त बनाने का दावा किया जा रहा है, वह अब “गड्ढों की जगह गढ़ों वाली सड़क” बनकर रह गई है। आरोप है कि डामर (अस्फाल्ट) सड़क के गड्ढों को तकनीकी नियमों के विपरीत सीमेंट कंक्रीट (CC) से भरा जा रहा है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी मरम्मत लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती और कुछ ही समय में उखड़ सकती है।
चारकोल डालकर छोड़े गए गड्ढे, बढ़ा हादसों का खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढों में केवल चारकोल या डामर सामग्री डालकर छोड़ दिया गया है। इन गड्ढों को समतल नहीं किया गया, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा लगातार बना हुआ है। वहीं कई गड्ढों की मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई है, जबकि अधिकांश गड्ढे जस के तस पड़े हुए हैं।
दिन में नहीं, रात के अंधेरे में क्यों हो रहा काम?
स्थानीय नागरिकों ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मार्ग पर दिन के समय कोई ऐसा भारी ट्रैफिक दबाव नहीं है, जिससे सड़क मरम्मत कार्य बाधित हो। इसके बावजूद निर्माण कार्य रात के अंधेरे में किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी जानबूझकर रात में काम कर रही है ताकि घटिया सामग्री और खराब कार्यप्रणाली पर किसी की नजर न पड़े।
रात में पर्याप्त रोशनी और निगरानी व्यवस्था नहीं होने के कारण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे में किए जा रहे इस कार्य से सरकारी धन का दुरुपयोग होने की आशंका और गहरा गई है।
सवाल पूछने पर इंजीनियर के तेवर गरम, ग्रामीणों में रोष
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब स्थानीय नागरिकों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। आरोप है कि मौके पर मौजूद कंपनी के इंजीनियर संजय तिवारी ने समस्याओं का समाधान करने के बजाय ग्रामीणों के साथ तीखे अंदाज में बातचीत की और आपत्तियों को नजरअंदाज किया। इस रवैये से ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्राम पंचायत डोक्या और क्षेत्र के नागरिकों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की तत्काल उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण कार्य में पाई जाने वाली अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और घटिया निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे जनआंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कें यदि शुरुआत में ही गुणवत्ता की कसौटी पर फेल हो जाएं, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं।


0 टिप्पणियाँ